गर्दन के दर्द में राहत पाने के ६ आसन (FOR NECK PAIN)

http://assan-vyayam.blogspot.in/2015/01/for-neck-pain.html

गर्दन(Neckpain) में दर्द रहने का सबसे बड़ा कारन है लंबे समय तक एक ही आसन में बैठकर काम करना और रात को गलत तरीके सोना और कसरत का अभाव देखा जाता है।
गर्दन में दर्द को दूर करने के लिए हम आपके लिए लायें है दैनिक व्यस्त कार्यक्रम में सात आसान योग मुद्राओ। जैसे की बालासन(Balasan), नटराजासन (Natrajasan),मजरासना (cowpose-catpose),सर्वंगासन(Sarvangasan) , त्रिकोणासन(Trikonasana), सवासना(Savasana) ।

नटराजासन (Natrajasan)
 

विधिः 
१.     पूर्ववत खड़े होकर दायें पैर को पीछे की और मोड़िए। दायां हाथ कन्धे के ऊपर से लेकर दाएं पैर का अंगूठा पकड़िए।
२.     दायां हाथ सामने सीधा ऊपर की और उठा हुवा होगा। इस पैर से करने के पश्वात दूसरे पैर से इसी प्रकार करे।

लाभ:
       गर्दन को लचीला बनाता  है और हाथ एवं पैर के स्नायु को विकास करता है। स्नायुमण्डल को सुद्धढ बनाता है।

त्रिकोणासन(TRIKONASANA)

१.     दोनों पैरो के बीच में लगभग डेढ़ फुट का अन्तर रखते हुए सीधे खड़े हो जाएँ। दोनों हाथ कंधो के समानान्तर पाश्व भाग मे खुले हुए हों।
२.     श्वास अन्दर भरते हुए बाएं हाथ को सामने से लेते हुए बाएं पंजे के पास भूमि पर टिका दें अथवा पंजे को एड़ी का पास लगायें तथा दाएं हाथ को ऊपर की तरफ उठाकर गर्दन को दाए ओर घुमाते हुए दाए हाथ को देखें ,फिर श्वास छोड़ते हुए पूर्व स्थिति में आकर इस तरह अभ्यास को बार बार करें।

लाभ:    कटी प्रदेश लचीला बनता है। पाश्वा भाग की चर्बी को कम करता है। छाती का विकास होता है।
मार्जरासन (Marjrasana)
(cowpose-catpose)

विधिः
१.      दोनों हाथों की हथेलियों एवं घुटनों को भूमि पर टिकाते हुए स्थिति लीजिये।

२.      अब श्वास अन्दर भरकर छाती और सिर को ऊपर उठाये ,कमर निचे की ओर झुकी हुई हो। थोड़ी देर इस स्थिति में रहकर श्वास बाहर छोड़ते हुए पीठ को ऊपर उठाये तथा सर को निचे झुकायें।

लाभ:
गर्दन के दर्द में राहत मिलती है और कटी पीड़ा ओर गैस ,कब्ज एवं फेफड़ो को मजबूत करता है और गर्भाशय को बाहर निकलने जैसो रोगो को दूर करता है।

सर्वांगासन(Sarvanga asan)

विधि :

१.  पीठ के बल सीधा लेट जाये।  पैर जोड़ के रखे,हाथो को दोनों और बगल में सटाकर हथेलियाँ जमीं की ओर करके रखे.

२. स्वास अंदर भरकर पैरो को धीरे धीरे ३० डिग्री , फिर ६० डिग्री  और अंत में ९० डिग्री  तक उठाए।पैरो को उठाते समय हाथो का सहारा ले। यदि  पैर सीधा न हो तो हाथो को उठाकर  कमर के पीछे रखे। पैरो को सीधा मिलाकर रखे और कोहनियाँ भूमि पर टिकी हुए रखे। आँखे बंद एवं पंजे ऊपर तने हुए रखे। धीरे -धीरे ये आसान २ मिनिट से शरू करके आधे घंटे तक करने कोशिश करे।

३. वापस आते समय जिस क्रम से उठे थे उसी क्रम से धीरे धीरे वापस आये। जितने समय तक सर्वांगासन किया जाये उतने ही समय शवाशन में विश्राम करे।

लाभ :
१.  गर्दन के स्नायुओ को लचीला बनता है और मोटापा ,दुर्बलता,कदवृद्धि में लाभ मिलते है ,एवं थकान आदि विकार दूर होते है।
२. इस आसन से थाइरोड को सक्रीय एवं पिच्युरेटी ग्लैड के क्रियाशील होने    से यह कद वृद्धि में उपयोगी है।

बालसन-विश्रामासन(Balasana)

विधिः 
१.      पेट के बल लेटकर बाएँ हाथ को सिर के निचे भूमि पर रखें तथा गर्दन को दाई और घुमाते हुए सर को हाथों पर रखें दें,बायाँ हाथ सिर कर निचे होगा तथा बाएं हाथ की हथेली दाएँ हाथ की निचे रहेंगी।

२.      दायें पैर को घुटने से थोड़ा मोडकर जैसे बालक लेटता है , वेसे लेटकर विश्राम करें। इसी प्रकार यह आसन दूसरी और से किया जाता है।

लाभ:
पुरे शरीर एवं मन की थकान को दूर करता है और गर्दन को आराम मिलता है।

शवासन
 विधिः
          पीठ के बल सीधे भूमि पर लेट जाइए।  दोनों पैरो में लगभग एक फूट का अन्तर हो तह दोनों हाथो को भी जंघाओं से थोड़ी दूर पर रखते हुए हाथों को ऊपर की और खोलकर रखें। आँखे बंद,गर्दन सीधी,पूरा शरीर तनाव रहित अवस्था में हो। धीरे-धीरे चार-पांच श्वास लम्बे भरें व् छोड़े। अब हमें इस समय शरीर को पूर्ण विश्राम देना है।
लाभ:
        सभी आसन के बाद किया जानेवाला ये आसान है। ये आसान शरीर,मन और स्नायुओं को पूर्ण विराम देता है।
Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s